वो परछाई

कहीं से एक मौसम आया,
ले प्यार की अंगराई रे ।

कहीं से फिर धुप जो निखरा,Trans
मस्त धरा पे छितराई रे ।

कहीं से पवन झकोरे लेता,
भौंरा दिशा फिर भरमाई रे ।

कहीं से एक कूक सी आई,
गुँजित दिशा चहक जाई रे ।

कहीं से एक संदेशा आया,
अभिलाषा जीवन की ले आई रे ।

कहीं से वह साथ चला फिर,
कैसी वह मेरी परछाई रे ।

छवि साभार : http://www.amandawoodward.com

3 comments so far

  1. समीर लाल on

    बढ़िया. बधाई.

  2. अनूप शुक्ल on

    बहुत खूब! अच्छा प्यार मौसम तुमको लपेट में लिये रहे।

  3. paramjitbali on

    बहुत बढिया!


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